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एक निजी चिट्ठी · दिल से

पापा,
ये कहानी
हमारी है।

आपने मुझे बचपन से बड़ा होते देखा है। आज मैं आपको दिखाना चाहता हूँ कि आपकी दी हुई ज़मीन पर मैं अपनी ज़िंदगी कैसे बना रहा हूँ।

आपका बेटा — साहिल

मेरी बात पढ़िए ↓
01 / शुरुआत

पापा, कुछ बातें हैं जो मैं अक्सर कह नहीं पाता।

हम रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कितनी बातें करते हैं — दुकान की, घर की, काम की, दुनिया की। लेकिन कुछ बातें मन में रह जाती हैं।

मैं जानता हूँ कि मेरी दुनिया का एक हिस्सा आपके लिए समझना आसान नहीं है। मैं कंप्यूटर पर वेबसाइट बनाता हूँ, लेख लिखता हूँ, मनोविज्ञान और इंसानों के व्यवहार पर सोचता हूँ, नए-नए प्रयोग करता हूँ। कभी-कभी ये सब बाहर से बस स्क्रीन पर बैठकर कुछ करते रहने जैसा दिखता होगा।

इसलिए मैंने सोचा, इस बार आपको सब कुछ आपकी भाषा में बताऊँ।

ये सिर्फ़ मेरी उपलब्धियों की कहानी नहीं है। ये उन लोगों और अनुभवों की कहानी भी है जिन्होंने मुझे यहाँ तक पहुँचाया — और उनमें आपकी जगह बहुत बड़ी है।
02 / हमारी जड़ें

दुकान सिर्फ़ दुकान नहीं थी।

मेहरौली में हमारे परिवार की किराने की दुकान ने मुझे कारोबार का एक ऐसा रूप दिखाया, जो किसी किताब में पूरा नहीं समा सकता।

ग्राहकों से रिश्ता बनाना, भरोसा निभाना, रोज़ के छोटे-बड़े फ़ैसले लेना, मुश्किल दिनों में भी काम चलाते रहना — ये सब मैंने अपने आसपास देखा।

आपके काम करने के तरीके से मुझे यह समझने का मौका मिला कि व्यापार सिर्फ़ पैसा कमाने का नाम नहीं है। इसमें ज़िम्मेदारी, धैर्य और लोगों को समझना भी शामिल है।

आज जब मैं मैनेजमेंट और इंसानों के व्यवहार के बारे में लिखता हूँ, तो मुझे अपनी पढ़ाई के साथ-साथ दुकान की दुनिया भी याद आती है।

03 / पढ़ाई और काम

मेहरौली से मुंबई तक — और फिर आगे।

दिल्ली विश्वविद्यालयश्री वेंकटेश्वर कॉलेज में कॉमर्स की पढ़ाई। कारोबार को समझने की बुनियाद मज़बूत हुई।
अर्न्स्ट एंड यंग (EY)पेशेवर दुनिया में काम करने और बड़े संगठनों को करीब से देखने का अनुभव।
JBIMS, मुंबई · 2021जमनालाल बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज़ से ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट में मैनेजमेंट की पढ़ाई। यहाँ इंसानों, संस्थाओं और नेतृत्व को समझने की रुचि और गहरी हुई।
आगे के अनुभवरिसर्च, कंसल्टिंग और सरकारी कामकाज से जुड़े अनुभवों ने मेरी सोच को नए दृष्टिकोण दिए।

इन नामों का मतलब मेरे लिए सिर्फ़ डिग्री या नौकरी नहीं है। ये मेरी सीखने की यात्रा के अलग-अलग पड़ाव हैं।

04 / मुश्किल अध्याय

हर साल आसान नहीं रहा।

मेरी ज़िंदगी में ऐसे दौर भी आए जब चीज़ें वैसी नहीं चलीं जैसी मैंने सोची थीं। कुछ समय कठिन रहा, कुछ फैसलों पर दोबारा सोचना पड़ा, और कभी खुद को फिर से संभालना पड़ा।

मैं यहाँ किसी को दोष देने या हर मुश्किल का हिसाब लिखने नहीं आया हूँ। बस इतना कहना चाहता हूँ कि मेरी कहानी सिर्फ़ अच्छे कॉलेज और अच्छे काम की नहीं है। इसमें रुकना, सीखना और दोबारा शुरुआत करना भी शामिल है।

मैं पूरी तरह बन चुका इंसान नहीं हूँ, पापा।
मैं अभी भी बन रहा हूँ।

05 / आज का साहिल

अब मैं क्या बना रहा हूँ?

लिखना: मैं अपने अनुभवों और पढ़ाई के सहारे जीवन, व्यवहार, मन और समाज पर लेख लिखता हूँ। कुछ लेख सार्वजनिक रूप से पढ़े जा सकते हैं।

रिसर्च: मैं इस सवाल पर काम कर रहा हूँ कि इंसान अपने बारे में बहुत कुछ समझने के बाद भी कभी-कभी उस समझ को काम में क्यों नहीं बदल पाता। इसे मैंने Identity–Action Gap का नाम दिया है। यह अभी विकसित हो रहा विचार है।

तकनीक: मैं वेबसाइट बनाना और डिजिटल माध्यम से अपने विचार प्रस्तुत करना सीख रहा हूँ। अब अपने काम को दुनिया के सामने रखने के लिए मुझे हमेशा किसी और पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।

खुशबू बनाना: मैंने परफ़्यूम बनाने के प्रयोग शुरू किए हैं। मुझे दिलचस्पी है कि खुशबू कैसे यादों और भावनाओं से जुड़ती है। इसी से House of Venus और Bottle Your Mood जैसे प्रयोग शुरू हुए।

ये सब अभी बढ़ते हुए काम हैं। मैं इनके बारे में बड़े-बड़े दावे नहीं करना चाहता। लेकिन इनमें मेरा मन, मेहनत और जिज्ञासा लगी है।

06 / आपका योगदान

पापा, आपकी भूमिका सिर्फ़ अतीत में नहीं है।

जिस परिवार, घर और कारोबार में मैं बड़ा हुआ, उसने मुझे दुनिया देखने का एक खास नज़रिया दिया। आपने जो काम सालों तक किया, वह मेरे लिए कारोबार को समझने की पहली वास्तविक पाठशाला भी रहा।

आज मेरे पास सीखने, सोचने और नए प्रयोग करने की जो गुंजाइश है, उसके पीछे परिवार की बनी हुई नींव का भी योगदान है। मैं इसे हल्के में नहीं लेना चाहता।

ज़रूरी नहीं कि आप मेरे हर लेख को पढ़ें, हर वेबसाइट को समझें या मेरे हर विचार से सहमत हों। मैं बस चाहता हूँ कि आप जानें कि मैं अपने जीवन को गंभीरता से भी लेता हूँ और उसे खुशी से जीना भी सीख रहा हूँ।

आपने मुझे शुरुआत दी। आगे की ज़िम्मेदारी मेरी है। और जो अच्छा मैं बनाऊँगा, उसमें आपकी मेहनत की भी एक छाप होगी।
अंत में, एक छोटी-सी बात

पापा,
मैं चाहता हूँ कि आप
मुझे बनते हुए देखें।

न किसी बड़ी सफलता का इंतज़ार करके।
न तब, जब सब कुछ बिल्कुल सही हो जाए।
अभी — जैसे मैं हूँ, और जैसे मैं धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा हूँ।

मुझे आपसे प्यार है। और मैं आपका आभारी हूँ।

आपका साहिल ❤️